टूटी इमारत और बिखरे रिश्ते : Heart Touching Original Sad Shayari in Hindi
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में अक्शर टूटी हुई ईमारत को देखता रहता हु
वो कैसे दिखती है
उनमे ई हुई दरारों को देखता हु
कहा तक वो दीवारों को तोडती है
कितने भीतर तक वो उस ईमारत को हिला देती है
जब कभी एक जुट हो कर खड़ी थी
आज वो मुह फेरे खड़ी है
जो बीच में आ गई एक दादर है
आशियाने को तोड़ मुस्कुराती है
ये दादर हर इन्सान के भीतर पनपती है
गौर करने पर भी नही ये दिखाती
ये दरारे ना जाने कहा से आती है
अपने ही कुछ लोग इसे बढ़ाते है
ना जाने फिर क्या पाते है
बता कर एक दुसरे को अपनी गलतिया
फिर जुदा हो जाते है
भीतर की दरार नही दिखती इन्हें
फिर खुशिया ढूढने चल पड़ते है
कौन समजाऐ इन्हें की
भेद बात करने से भी ठीक होते है
ये एक साधारण सी बात है
लोग क्यों नही समजते
में अक्सर देखता हु टूटे हुए रिश्ते
जो मोहताज रेह जाते है
बात के बिना ही अक्सर लोग बिछड़ जाते है
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