हमारे शरीर या आत्मा का वो अटूट हिस्सा बन गया हो लगता है की उसके बिना हमारा जीना,जीना ना लगे ........Personal Thoughts
तितली की तरह खुश्बू से भरा होता है मन और बेहद ही कोमल और नाजुक होता है ,किसी के भी एक वार से ये कच्ची डोर जो मन से जुडी होती है वो टूट जाती है फिर वहा सिर्फ अँधेरा और अकाल सा मोसम रहने लगता है बाहरी दिखने वाले जो घाव होते है वो दवाईओ से भर जाते है , जो कभी हमारी आत्मा को लगे वो जख्म ना कभी भरते है ना उसका दर्द कम होता है बस वाक्क्त के साथ इंसान उसके साथ जीना शुरू कर देता है वक़्त के साथ उस दर्द से हमें सुकून मिलाने लगता ,जेसे मनो कोई हमारे शरीर या आत्मा का वो अटूट हिस्सा बन गया हो लगता है की उसके बिना हमारा जीना,जीना ना लगे उस दर्द को जेसे हमने अपनी आत्मा के साथ बंधन में बांध दिया हो हमारी आत्मा भी उसे पा कर जेसे मुतमयीन हो वो कुछ और चाहता ही नही
उसके बिना जीना ,जीना ही ना लगे
जेसे कोई ख्वाब हो
तुम हो दिल के करीब
और तुम ही मेरा वो दर्द हो
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मन को चाहे कितना ही टटोल लो पर बार बार वो एक ही शख्स को चाहे तो आपका ये समजना बेहतर है की अब आपकी तलाश ख़तम हो चुकी है जो आपको मिलना था वो मिल चुका है पर इंसान परिस्थिति के आगे हार मान कर अपनी दिशा से दूर जाता है ,ना चाहते हुए भी उसे वो करना पड़ता है जिसमे उसकी आत्मा घुटती है और ता-उम्र अपनी भूली हुई दिशा को ढूढती रहती है पर बोहत देर हो चुकी होती है फिर वो मन ना फिर उस राह पर आता है ना कभी वो बिछड़े गए पलो को ना पा सकती है बस तन्हाई और मन में बड़ा सा बोज जो ताउम्र कम नही होता जो एक दर्द के रूप में उसकी आत्मा से जुडा रहता है हलाकि अब उस इंसान को इस दर्द की आदत सी हो गई होती है
मैं रहता हु तेरे बगेर ही अब तन्हा
इस तन्हाई की अब मुझे आदत सी हो गई
कोई ना रहे मेरा
अब यही मेरी ख्वाइश हो गई
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जब किसी को तन्हाई की आदत लगती है मनो की दुनिया में इसे बुरी आदत कोई नहीं होती क्यों की इंसान को इंसान से डर लगने लगता है इंसानों के बिच उसे घबराहट होने लगती जेसे वो लोगो की भीड़ में सास नही ले पता असा मैंने अक्सर महसुसू किया है अपनों की भीड़ में जहा सिर्फ रिश्ते नाम के होते वो बस दिखावे होते जहा परिवार से ज्यादा समाज की परवाह की जाती है और समाज में कैसे सर ऊँचाकर कर रहना कैसे है ये देखा जाता है और क्या असे ही चलती है दुनिया और समाज जहा हर कोई एक दुसरे को निच्चा कैसे महसुसू कराया जाये


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