मुझे खुद के ही मसाले समझ नहीं आते ||sad hindi poetry
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मुझे खुद के ही मसाले समझ नहीं आते ||sad hindi poetry




मैं तंग हूं दूसरों से

कहीं ज्यादा खुद से

दूसरों के मसलो के बेहतरीन

इलाज होगे मेरे पास

मुझे खुद के ही मसाले

समझ नहीं आते

बड़ी जुस्तजू थी तेरे बाग

का फूल बनने

मुझे भी बिखर ना था

तेरे पैरों तले

एक उम्र गुजारी है

मैंने तेरी यादों में

अब जलना ना है

मुझे तेरे पलको तले

तेरी आंखों के आंसू बनकर

बहना है मुझे

तूने जो नहीं कहा वो

सुनना है मुझे

और तेरी आदतों में ढालना है मुझे

बड़ी मशक्कत की है मैंने

तेरे दिल में रहने के लिए

अब इस घर से बे-घर

नहीं होना मुझे

_Radhe...

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